साहित्य ग्राम
साहित्य ग्राम
वर्षों से हिन्दी साहित्य आकाश में शुचिता और गुणवत्तायुक्त पाठ्य सामग्री पाठकों की पहुँच तक आने में संघर्ष के कई पायदान तय कर रही थी। हिन्दी का पाठक उच्चस्तरीय गुणवत्ता युक्त सामग्री की खोज करता है किन्तु उसे यह सामग्री कम ही उपलब्ध हो पा रही है। ऐसे समय में शोधात्मक और सरल भाषा में साहित्यिक सामग्री, समाचार और कविताएँ पाठकों की पहुँच तक लाने के लिए मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा एक मासिक समाचार पत्र ‘साहित्य ग्राम’ का प्रकाशन 1 अप्रैल 2021 को इंदौर मध्यप्रदेश से आरम्भ किया गया। यह समाचार पत्र भारत सरकार के पराक्रम भारत के प्रेस महापंजीयक (Press Registrar of General) में पंजीबद्ध है जिसका पंजीयन क्रमांक MPHIN/2021/85518 है। इसके संस्थापक एवं संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ हैं, जो मूलतः इंदौर से हैं और मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के साथ-साथ विगत दो दशकों से पत्रकारिता कर रहे हैं। अख़बार की सह-संपादक दिल्ली निवासी भावना शर्मा हैं, जो कहानीकार होने के साथ-साथ मातृभाषा उन्नयन संस्थान की राष्ट्रीय सचिव हैं।
इस समाचार पत्र का उद्देश्य विशुद्ध हिन्दी साहित्य सेवा है, इस अख़बार के माध्यम से जन उपयोगी आलेख, कविताएँ, साक्षात्कार, स्तम्भ, पुस्तक चर्चा, दीर्घा, कालजयी साहित्यकारों के जन्म व निधन की तिथियाँ इत्यादि के साथ-साथ हिन्दी व्याकरण सम्मत जानकारी भी प्रकाशित की जा रही है। साहित्य ग्राम अपने समय में हिन्दी प्रचार के अपने वृहद उद्देश्य को स्थापित करने और हिन्दी के रचनाकारों को सशक्त मंच उपलब्ध करवाकर गुणवत्ता युक्त पाठ्य सामग्री प्रकाशित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
साहित्य ग्राम प्रतिमाह 5000 से अधिक पाठकों के हाथों में पहुँचता है और डिजिटल रूप में हज़ारों लोगों तक आसानी से पहुँच रहा है। इंदौर और नई दिल्ली से एकसाथ प्रकाशित होने वाले इस साहित्यिक समाचार पत्र की लोकप्रियता साहित्य जगत में कम समय में अधिक हो रही है। इसी के साथ प्रतिवर्ष साहित्य ग्राम द्वारा सुधि साहित्यिक लेखकों को 'साहित्य सारथी सम्मान' से सम्मानित किया जाता है। देश भर के सैंकड़ों लोगों की रचनाएँ प्रकाशित हो रही हैं और अब तो दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, तेलंगाना,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ से भी पाठक परिवार समृद्ध है। कुल मिलाकर साहित्य ग्राम एक ऐसा साहित्यिक अख़बार बन रहा है, जो परिवार की मानसिक क्षुधा की आपूर्ति के लिए पर्याप्त है।
साहित्य ग्राम
हिन्दी साहित्य की शुचिता और गुणवत्तायुक्त पाठ्य सामग्री को पाठकों की पहुँच तक लाने का सशक्त अभियान
1 अप्रैल, इंदौर
प्रतिमाह
पाठक परिवार
नियमितता
हिन्दी साहित्य सेवा का एक अनूठा और सशक्त मंच
वर्षों से हिन्दी साहित्य आकाश में शुचिता और गुणवत्तायुक्त पाठ्य सामग्री पाठकों की पहुँच तक आने में संघर्ष के कई पायदान तय कर रही थी। हिन्दी का पाठक उच्चस्तरीय गुणवत्ता युक्त सामग्री की खोज करता है किन्तु उसे यह सामग्री कम ही उपलब्ध हो पा रही थी।
ऐसे समय में शोधात्मक और सरल भाषा में साहित्यिक सामग्री, समाचार और कविताएँ पाठकों की पहुँच तक लाने के लिए मातृभाषा उन्नयन संस्थान ने 'साहित्य ग्राम' का प्रकाशन आरम्भ किया।
यह समाचार पत्र भारत सरकार के प्रेस महापंजीयक में पंजीबद्ध है (पंजीयन क्रमांक: MPHIN/2021/85518)। इसके संस्थापक एवं संपादक डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' हैं, जो मूलतः इंदौर से हैं और मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के साथ-साथ विगत दो दशकों से पत्रकारिता कर रहे हैं।
इस समाचार पत्र का उद्देश्य विशुद्ध हिन्दी साहित्य सेवा है। जन उपयोगी आलेख, कविताएँ, साक्षात्कार, स्तम्भ, पुस्तक चर्चा, दीर्घा, कालजयी साहित्यकारों के जन्म व निधन की तिथियाँ और हिन्दी व्याकरण सम्मत जानकारी प्रकाशित की जाती है। कुल मिलाकर साहित्य ग्राम एक ऐसा साहित्यिक अख़बार बन रहा है, जो परिवार की मानसिक क्षुधा की आपूर्ति के लिए पर्याप्त है।
| पंजीयन क्र. | MPHIN/2021/85518 |
| प्रकाशन तिथि | 1 अप्रैल 2021 |
| प्रकार | मासिक पत्र |
| प्रकाशन स्थल | इंदौर & दिल्ली |
| मान्यता | Press Registrar |
प्रतिवर्ष उत्कृष्ट साहित्यकारों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाता है।
प्रतिमाह
देश-विदेश
परिवार
J&K, तेलंगाना व अन्य
प्रकाशित सामग्री
विशेषजनोपयोगी आलेख
शोधात्मक एवं सरल भाषा में ज्ञानवर्धक साहित्यिक आलेख
कविताएँ
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साक्षात्कार
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