सेवा सर्वोपरि
सेवा सर्वोपरि
भारतीय संस्कृति में सेवा को सर्वोच्च धर्म माना गया है। हमारे शास्त्रों और परम्पराओं में ‘सेवा परमो धर्मः’ का आदर्श सदैव जीवन का मार्गदर्शक रहा है। इसी सेवा-परम्परा ने भारतीय समाज को सदियों तक एकजुट और संवेदनशील बनाए रखा है। अनेक संकटों, आपदाओं और विभीषिकाओं के कालखंडों में भी भारतीय समाज की सामाजिक संरचना इसलिए सुरक्षित रही क्योंकि यहाँ सेवा, सहयोग और करुणा के संस्कार गहराई से रचे-बसे हैं। इन्हीं मानवीय मूल्यों को आधार बनाकर मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा मानव सेवा के उद्देश्य से ‘सेवा सर्वोपरि’ प्रकल्प की स्थापना 24 अप्रैल 2021 को इन्दौर से की गई। इस प्रकल्प के संस्थापक साहित्यकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ हैं। ‘सेवा सर्वोपरि’ का मूल उद्देश्य समाज के वंचित और जरूरतमंद वर्गों तक सहायता पहुँचाना, सेवा की संस्कृति को सशक्त करना तथा युवाओं को समाजहित के कार्यों से जोड़ना है।
कोरोना काल में सेवा का व्यापक कार्य
कोरोना महामारी के कठिन समय में ‘सेवा सर्वोपरि’ प्रकल्प ने समाज के विभिन्न वर्गों तक सहायता पहुँचाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। इस दौरान हजारों जरूरतमंद परिवारों को निःशुल्क राशन किट वितरित की गईं। किन्नर समाज सहित अनेक वंचित वर्गों को राशन और कोरोना सुरक्षा किट उपलब्ध कराई गईं।
फल-सब्ज़ी विक्रेताओं, रिक्शा चालकों, पुलिसकर्मियों और अन्य सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों को कोरोना सुरक्षा कवच किट प्रदान की गई। साथ ही महामारी के दौरान लोगों की सहायता के लिए एक ऑनलाइन कॉल सेंटर प्रारंभ किया गया, जिसके माध्यम से ऑक्सीजन सिलेंडर, आवश्यक दवाइयों, अस्पतालों की जानकारी, चिकित्सकीय परामर्श, प्लाज़्मा और अन्य आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था में सहयोग प्रदान किया गया।
इसके अतिरिक्त मरीजों के परिजनों और पुलिसकर्मियों के लिए पानी की बोतलों का वितरण, जरूरतमंद परिवारों तक कच्चा राशन पहुँचाना जैसे अनेक कार्य निरंतर किए गए। इस प्रकार ‘सेवा सर्वोपरि’ प्रकल्प आपदा के समय समाज के लिए आशा और सहयोग का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरा।
निरंतर चल रहे सेवा कार्य
कोरोना संकट के उपरांत भी ‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ के भाव को ध्यान में रखते हुए इस प्रकल्प के अंतर्गत अनेक सेवा गतिविधियाँ निरंतर संचालित की जा रही हैं। इनमें प्रमुख रूप से-
- नेत्रदान, रक्तदान और देहदान शिविरों का आयोजन
- जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा में सहयोग
- गरीब परिवारों के लिए भोजन वितरण
- जरूरतमंद कन्याओं के विवाह में सहायता
- अस्पतालों में मरीजों को फल वितरण
- गरीब बच्चों को शिक्षण सामग्री प्रदान करना जैसे कार्य शामिल हैं।
समाज से सहभागिता का आह्वान
‘सेवा सर्वोपरि’ प्रकल्प के अंतर्गत सेवादार प्रत्येक माह एक रविवार को बस्तियों में जाकर समयदान करते हैं। इस दौरान वस्त्र, भोजन और अन्य आवश्यक सामग्री का वितरण करने के साथ-साथ स्वास्थ्य शिविरों का भी आयोजन किया जाता है। भविष्य में बस्ती सेवा, जल सेवा और स्वास्थ्य सेवा जैसे अभियानों के माध्यम से समाज में जनजागरण करना तथा जरूरतमंद वर्गों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी इस प्रकल्प का कार्य विस्तार किया जा रहा है।
मानव सेवा के इस पवित्र अभियान में समाज के सभी संवेदनशील नागरिकों को सहभागी बनने का आह्वान किया जाता है, ताकि सेवा की यह परम्परा और अधिक व्यापक रूप में समाज तक पहुँच सके।
सेवा सर्वोपरि
“सेवा परमो धर्मः” — मानवता, सहयोग और संवेदनशीलता का अभियान
सेवा की भारतीय परम्परा
भारतीय संस्कृति में सेवा को सर्वोच्च धर्म माना गया है। हमारे शास्त्रों और परम्पराओं में ‘सेवा परमो धर्मः’ का आदर्श सदैव जीवन का मार्गदर्शक रहा है। इसी सेवा-परम्परा ने भारतीय समाज को सदियों तक एकजुट और संवेदनशील बनाए रखा है।
अनेक संकटों, आपदाओं और विभीषिकाओं के कालखंडों में भी भारतीय समाज की सामाजिक संरचना इसलिए सुरक्षित रही क्योंकि यहाँ सेवा, सहयोग और करुणा के संस्कार गहराई से रचे-बसे हैं।
इन्हीं मानवीय मूल्यों को आधार बनाकर मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा मानव सेवा के उद्देश्य से ‘सेवा सर्वोपरि’ प्रकल्प की स्थापना 24 अप्रैल 2021 को इन्दौर से की गई।
इस प्रकल्प के संस्थापक साहित्यकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ हैं।
कोरोना काल में सेवा का व्यापक कार्य
कोरोना महामारी के कठिन समय में ‘सेवा सर्वोपरि’ प्रकल्प ने समाज के विभिन्न वर्गों तक सहायता पहुँचाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई।
निरंतर चल रहे सेवा कार्य
कोरोना संकट के उपरांत भी ‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ के भाव को ध्यान में रखते हुए इस प्रकल्प के अंतर्गत अनेक सेवा गतिविधियाँ निरंतर संचालित की जा रही हैं।
- नेत्रदान, रक्तदान और देहदान शिविरों का आयोजन
- जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा में सहयोग
- गरीब परिवारों के लिए भोजन वितरण
- जरूरतमंद कन्याओं के विवाह में सहायता
- अस्पतालों में मरीजों को फल वितरण
- गरीब बच्चों को शिक्षण सामग्री प्रदान करना
समाज से सहभागिता का आह्वान
‘सेवा सर्वोपरि’ प्रकल्प के अंतर्गत सेवादार प्रत्येक माह एक रविवार को बस्तियों में जाकर समयदान करते हैं।
इस दौरान वस्त्र, भोजन और अन्य आवश्यक सामग्री का वितरण करने के साथ-साथ स्वास्थ्य शिविरों का भी आयोजन किया जाता है।
भविष्य में बस्ती सेवा, जल सेवा और स्वास्थ्य सेवा जैसे अभियानों के माध्यम से समाज में जनजागरण करना तथा जरूरतमंद वर्गों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी इस प्रकल्प का कार्य विस्तार किया जा रहा है।