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हिन्दी पत्रकारिता की द्विशताब्दी पर एकाग्र व्याख्यान सम्पन्न
रगड़ाई-घिसाई से नहीं गुज़रा, वह एआई वाला हो गया- श्री कर्णिक
अब रिपोर्टर नाम की संस्था को बचाने की आवश्यकता- भुवनेश सेंगर
इंदौर। हि...
साहित्य ग्राम : हिन्दी साहित्य और संस्कृति का सशक्त हस्ताक्षर
हिन्दी साहित्य सदैव भारतीय संस्कृति, विचार और संवेदनाओं का प्राणतत्व रहा है। समय-समय पर अनेक साहित्यकारों, पत्रकारों और संस्थाओं ने हिन...
हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्षों पर एकाग्र व्याख्यान रविवार को
इंदौर। हिन्दी पत्रकारिता की द्विशताब्दी पूर्ण होने पर हिंदी सेवी मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्य ग्राम के द्वारा व्याख्यान का आयोजन 31 मई रव...
पुस्तक संस्कृति से बचेगी भारतीय संस्कृति और भाषाएँ
भारत की संस्कृति सदा से ही ग्रन्थ और पुस्तकों के अनुशासन से समृद्ध श्रुति-स्मृति परम्परा की संस्कृति है। वेद, उपनिषद्, पुराण, बौद्ध त्र...
एआई से संकट में आ गई लेखकीय मौलिकता
चिंतन हो अथवा लेखन, सर्जन हो अथवा निर्माण, दृष्टि हो अथवा दृष्टिकोण, रंग हो अथवा चित्रकारी सब कुछ सदा से मौलिक ही आकर्षित करता आ रहा है...
पत्रकारिता और साहित्य से घटता हिन्दी और क्षेत्रीय बोलियों का प्रभाव
भाषाएँ और बोलियाँ भारत की न केवल सांस्कृतिक ध्वजवाहक हैं बल्कि इस राष्ट्र का परिचय भी हैं। यह वही एकात्म के चिंतन की संस्कृति है, जिसने...
किताबों से स्क्रीन तक बदलते दौर का पाठक
मनुष्य सामाजिक प्राणी है और समाज एक समय जागरण के लिए किताबों के सहारे रहता था, जन-जागरण के लिए कोई अन्य साधन अधिक उपलब्ध नहीं होने से घ...
लोकमंगल की कामना की भाषा है हिन्दी
भाषाएँ परस्पर संवाद और संचार की माध्यम होती हैं, जिनकी व्यापकता इस बात से सिद्ध होती है कि उनमें कितना सृजन लोकमंगल को समर्पित है। वैश्...
भारतीय वाङ्मय में प्रस्फुटित होता बसंत
ऋतुराज बसन्त का आगमन और फिर न केवल प्रकृति प्रदत्त मौसम बासंती होता है बल्कि उस दौरान रची-गढ़ी जाने वाली रचनाएँ भी बासंती रंग में पीली ह...