साहित्य ग्राम : स्थापना की संकल्पना

भारतीय साहित्यिक परंपरा विश्व की सबसे समृद्ध और जीवंत परंपराओं में से एक रही है। हिन्दी भाषा के व्यापक विस्तार, साहित्य सृजन की निरंतरता तथा देशभर में सक्रिय लाखों साहित्यकारों और पाठकों के बावजूद एक ऐसे मंच का अभाव लंबे समय से अनुभव किया जा रहा था, जो साहित्य, भाषा, संस्कृति और समाज के मध्य एक सशक्त सेतु का कार्य कर सके। साहित्यिक गतिविधियाँ विभिन्न स्तरों पर संचालित तो हो रही थीं, किन्तु उनके समुचित दस्तावेजीकरण, प्रचार-प्रसार और व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँच की व्यवस्था सीमित थी।

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भारत भूमि शिक्षा, भाषा, साहित्य और रचनाधर्मिता की उर्वरा भूमि है, और अधिकांशतः लेखन हिन्दी भाषा में होता है। जनसंख्या की दृष्टि से लगभग 15% से 20% आबादी लेखन कर्म से जुडी है और पाठकों की संख्या भी लगभग इतनी ही मानी जा सकती है। ऐसे में भारतीय जनमानस की वैचारिक ख़ुराक को तीक्ष्ण करना भी एक दायित्व है। इसी आवश्यकता और दायित्वबोध से ‘साहित्य ग्राम’ की स्थापना की संकल्पना जन्मी। मातृभाषा उन्नयन संस्थान ने यह अनुभव किया कि हिन्दी भाषा के संवर्धन और साहित्यिक चेतना के विस्तार के लिए एक ऐसे समाचार पत्र की आवश्यकता है, जो केवल समाचारों का संकलन न होकर साहित्यिक समाज का प्रतिनिधि मंच बने। ऐसा मंच जो साहित्यकारों, पाठकों, शोधार्थियों, शिक्षकों और भाषा प्रेमियों को एक सूत्र में बाँध सके तथा हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के राष्ट्रीय अभियान को नई दिशा प्रदान कर सके। संस्थान ने अपने साहित्यिक समाचार पत्र की संकल्पना को मूर्त रूप देना आरंभ किया। एक ऐसा समाचार पत्र जो देश के साहित्यिक जनसमूह को वैचारिक सम्पन्नता के साथ हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए प्रतिबद्ध करें, व्यावहारिक रूप से उन्हें हिन्दी भाषा से जोड़कर भाषा सम्पन्न करें इसके साथ-साथ ‘हर घर हिन्दी अभियान’ को बलवान करते हुए सटीक, सुव्यवस्थित और तथ्यात्मक रूप से सही जानकारियों को उपलब्ध करवाएँ व राष्ट्र प्रथम के भाव को बलिष्ठ करें।

‘साहित्य ग्राम’ की परिकल्पना का मूल उद्देश्य हिन्दी साहित्य की विविध विधाओं, साहित्यकारों की रचनात्मक गतिविधियों, साहित्यिक आयोजनों, पुस्तकों, शोध, भाषा-विमर्श तथा सांस्कृतिक सरोकारों को व्यवस्थित रूप से समाज के समक्ष प्रस्तुत करना था। इसके साथ ही यह भी लक्ष्य रखा गया कि पाठकों को तथ्यपरक, प्रामाणिक और सकारात्मक सामग्री उपलब्ध कराई जाए, जिससे उनकी वैचारिक दृष्टि का विकास हो तथा साहित्य के प्रति उनकी रुचि और अधिक प्रगाढ़ हो।

‘साहित्य ग्राम’ केवल एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि हिन्दी भाषा और साहित्य के लिए समर्पित एक वैचारिक आंदोलन है। इसकी संकल्पना में ‘हर घर हिन्दी अभियान’ को बल प्रदान करना, नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा से जोड़ना, साहित्यकारों को अभिव्यक्ति का मंच उपलब्ध कराना तथा राष्ट्रहित, सांस्कृतिक मूल्यों और भाषाई अस्मिता को सुदृढ़ करना प्रमुख रूप से शामिल रहा है।

इन्हीं उद्देश्यों को मूर्त रूप देने के लिए वर्ष 2021 में इंदौर से ‘साहित्य ग्राम’ का पंजीयन किया गया। इसके संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ तथा सह-संपादक भावना शर्मा हैं। स्थापना के समय से ही ‘साहित्य ग्राम’ ने स्वयं को हिन्दी भाषा, साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना के संवाहक के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया है। आज यह समाचार पत्र देशभर के साहित्यिक समुदाय को जोड़ने, साहित्यिक गतिविधियों को गति देने और हिन्दी के भविष्य को सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर सक्रिय है। ‘साहित्य ग्राम’ की स्थापना वस्तुतः उस विचार का प्रतिफल है, जो मानता है कि भाषा केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा और सांस्कृतिक पहचान का आधार होती है। हिन्दी की इसी आत्मा को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प ही ‘साहित्य ग्राम’ की स्थापना का मूल प्रेरणा स्रोत है।