संपादकीय

छद्म नारीवाद की भेंट चढ़ता आधुनिक स्त्री विमर्श

वो मोमबत्ती लेकर तो निकली पर असल गुनहगार गायब हो गए, वो नारीवाद और स्त्री स्वच्छन्दता के नाम पर नग्नता को अपनाने लग गई, वो चीख़ने तब लग...
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संपादकीय

साहित्य से विलुप्ति की कगार पर ‘लोक’

दुर्भाग्य! दुःखद! चिंताजनक! अब क्या यही कहना रह गया है लोक के भाग्य में। विगत दो दशकों से साहित्य समाज की चिंताओं से निरंतर लोक, गाँव, ...
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संपादकीय

बुद्धिजीवी साहित्यकारों पर क्यों हावी ‘वितण्डावाद’?

तर्कों पर कुतर्क हावी, बुद्धि पर कुबुद्धि हावी, दृष्टि पर मतान्धता हावी, विचारों पर अविचार हावी, मान्यताओं पर अस्वीकृति हावी, कर्त्तव्य...
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संपादकीय

हिन्दी के साहित्य समाज की जड़ ‘गोष्ठी परम्परा’

समाज जब जड़ता को धारण करने लग जाए, जब अहम की गठरी का बोझ ढोने लग जाए, जब सर्व हित का रास्ता छपास का आदी हो जाए, जब कलम टकसाल की ओर मुड़ने...
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संपादकीय

साहित्य से ग़ायब हो रहा ‘ऐतिहासिक लेखन’

न गाँव बच रहे न लोक, न इमारतों का ज़िक्र है न लोगों का, न मनुष्य बच रहे न मनुष्यता, न तथ्य है न तारतम्यता, न खोज है न खोजी प्रवृत्ति, न ...
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संपादकीय

बाक़ी है सुनना अभी आज़ादी का मेघ-मल्हार

सावन की रिमझिम फुहारे थीं, दिनभर विभाजन की विभीषिका थी, कहीं मातम पसर रहा था, कहीं लोग आनंदित थे, कहीं गाँधी का विलाप था तो कहीं नेहरू ...
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संपादकीय

क्या हिन्दी बोलना भारत में अपराध है?

बड़ा अटपटा प्रश्न सामने देखकर हर कोई चौंक जाएगा, हिन्दी भारत की राजभाषा है, और राजभाषा अधिनियम यह कतई नहीं कहता कि आप अन्य भाषा या बोली ...
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संपादकीय

विश्व में भारतीयता का अनुशासन ‘हिन्दी’

भारत भारती का जयघोष हर दिशा में हो रहा है, बंकिम बाबू द्वारा लिखित और भारतीय संविधान में वर्णित राष्ट्रीय गीत वन्देमातरम् अपने 150 वर्ष...
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सम्मान

साहित्य सारथी सम्मान

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के मुखपत्र मासिक साहित्य ग्राम द्वारा अख़बार से जुड़े चयनित रचनाकारों को साहित्य सारथी सम्मान से सम्मानित किया जा...
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